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अक्षरा -संस्कृत वाङ्मय में निहित गूढ़ तत्त्वों तथा नवसर्जनात्मक रचनओं को प्रकाश में लाने के दृष्टिकोण से विश्वविद्यालय ने एक वार्षिक संस्कृत पत्रिका प्रकाशित करने का दृढसंकल्प रखते हुए वर्ष 2004 में इसका प्रथम अंक अक्षरा के नाम से प्रकाशित किया ।  जिसका लोकार्पण वसन्त पंचमी, 13 फरनरी, 2005 को श्री घनश्याम तिवाड़ी, माननीय शिक्षा मंत्री, राजस्थान सरकार ने किया ।

वेद, दर्शन, व्याकरण, साहित्य आदि विषयों में सम्बद्ध 35 रचनाओं से संवलित इस पत्रिका के प्रधान सम्पादक निवर्तमान कुलपति, प्रो. सत्यदेव मिश्र हैं तथा पत्रिका का संपादन प्रो. ताराशंकर शर्मा, प्रो. अशोक कुमार तिवारी,  डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने किया ।

व्यख्यानमणिमाला - विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विशिष्ट व्याख्यानमाला में राष्यट्रीयस्तर के विद्वानों द्वारा दिये गये व्याख्यानों का संग्रह कर वर्ष 2005 में व्याख्यान मणिमाला के नाम से माननीय कुलपति प्रोफेसर के.वि. रामक्रिष्णमाचार्युलु जी के प्रधान सम्पादकत्व में प्रकाशित किया गया है । इस के सम्पादक डॉ. ताराशंकर शर्मा एवं डॉ. भास्कर शर्मा हैं ।  इस ग्रन्थ का लोकार्पण 14 सितम्बर 2005 को माननीय उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत द्वारा भवन लोकार्पण समारोह में किया गया ।